27 जून को रवीन्द्र भवन का सत्र दो काम एक साथ कर रहा था। एक तरफ प्रदेश के एमएसएमई को सार्वजनिक उपक्रमों से जोड़ना, दूसरी तरफ उत्पाद पर भारतीय मानक कैसे लगते हैं, यह बताना। विषय पंक्ति थी—सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश। आयोजन भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने विश्व बैंक की आरएएमपी योजना के अंतर्गत किया।
भारतीय मानक ब्यूरो से मोहम्मद रिजवान और मोहम्मद तौसीफ ने मानकीकरण, प्रमाणन और शुल्क रियायतों की जानकारी दी। मंच के पीछे बीआईएस प्रमाणन का बैनर था। यह प्रशिक्षण कक्ष का दृश्य है, प्रयोगशाला का नहीं।
खरीदार मेज पर कौन थे?
बीएचईएल के पंकज कुमार झा और मीनाक्षी सिंह ने वेंडर पंजीकरण बताया। गेल से नवीन जमालमुडी, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स से विपुल जैन, पावरग्रिड से पल्लवी मिश्रा आए। रेसोनिया, जेडब्लू, फैबइंडिया और ओलम एग्री के प्रतिनिधियों ने अपेक्षाएँ रखीं। बात निविदा, दस्तावेज, गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति की थी।
नतीजा कब माना जाए?
विज्ञप्ति उद्यमियों को प्रक्रिया से परिचित कराने की है। कितने उद्यम उसी दिन बीआईएस चिह्न ले आए या किसी उपक्रम की सूची में चढ़े, यह नहीं लिखा। मानक तब नतीजा बनता है जब प्रयोगशाला का प्रमाण पत्र हाथ में हो। वह दिन तैयारी का था।
मुख्य बातें
- कार्यक्रम विश्व बैंक की आरएएमपी योजना के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने कराया।
- बीएचईएल, गेल, एनसीएल और पावरग्रिड के अधिकारियों ने खरीद प्रक्रिया बताई।
- सत्र जानकारी का है; उसी दिन प्रमाणपत्र मिला हो, ऐसा उल्लेख नहीं है।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



